प्यास बुझाने भटकते मवेशी - Sri Narada News

प्यास बुझाने भटकते मवेशी

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                                     नदी के गड्डो मंेभरा पानी मवेशियों को पिलाता किसान

बेगमगंज। भीषण गर्मी के कारण जहां मवेशियांे को खेतों आदि मंे पेट भरने के लिए चारा नसीब हो रहा है वहीं प्यास बुझाने के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है या फिर नालियांे से होकर नदी मंे पहुंच रहा गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं शहर के आसपास तो मवेशियंो को पानी मिल रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों मंे पानी की कमी
के कारण मवेशी अपनी प्यास बुझाने भटक रहे है वहीं कुछ जंगली जानवर भी गांवो की तरफ प्यास के कारण रूख कर लेते है बावजूद उन्हें भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र की सेमरी नदी को छोड़कर शेष नदियां नाले  पूरी तरह सूख चुके है जंगली नालों में पानी कहीं कहीं बचा है नदियों में कुछ स्थानों को छोडकर गड्डों में पानी भरा है जो सड़ चुका है और बदबू देने लगा है ऐसे ही पानी से मवेशी अपनी प्यास बुझा रहे है। पानी की कमी के चलते लोग रतजगा कर अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी भर रहे हे फिर वे मवेशियों के लिए कहां से पानी भरकर लाएं उनके लिए यह समस्या बन गई है।  ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर जल  स्त्रोत सूख गए है या फिर उनका जल स्तर काफी नीचे पहुंच गया है। ऐसी स्थिती में मेवशी यहां वहां गड्डों में भरा गंदा पानी पीकर बीमार भी हो रहे है जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। एक वक्त था जब लोग कुए बावड़ी बनवाते थे तो एक स्थान ऐसा भी निश्चित करते थे जहां पानी भरते समय फिकने वाला पानी एकत्रित हो जाता था या फिर स्नान करने के बाद का पानी एकत्रित हो जाता था और मवेशी अपनी प्यास बुझाने वहां पहुंच जाते थे। लेकिन जब से नल या टयूववेल का दौर शुरू हुआ तो यह प्रक्रिया बंद सी हो गई है। मवेशियों को भटकता देख बुद्धीजीवी वर्ग ने शासन से मांग की है कि जितने भी शासकीय या अशासकीय जल स्त्रोत है  उनके पास हौज बनवाई जाएं ताकि मवेशी उसमें भरे जल से अपनी प्यास बुझा सकें।
   

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