मप्र में श्वेत क्रांति: देश में पहली बार गांव में ही किए जाएंगे एंब्रियों ट्रांसप्लांट - Sri Narada News

मप्र में श्वेत क्रांति: देश में पहली बार गांव में ही किए जाएंगे एंब्रियों ट्रांसप्लांट

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भोपाल। देश में पहली बार दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत नस्लों के एंब्रियों ट्रांसप्लांट गांव-गांव में किए जाएंगे, जोकि डॉक्टरों के बजाय प्रशिक्षित गो सेवक या पशु मित्र करेंगे। नतीजे में प्रदेश की मालवी और निमाड़ी नस्लों का सरंक्षण हो सकेगा। इससे उन्नत देसी नस्लों को बढ़ावा मिलने से मध्यप्रदेश श्वेत क्रांति की ओर बढेगा। 

दरअसल अभी तक एंब्रियों ट्रांसप्लांट का काम विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों द्वारा प्रयोग शालाओं में या फिर अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अस्पतालों में ही किया जाता रहा है। इससे बेहद कम ट्रांसप्लांटेशन हो पाता था। यही कारण था कि प्रदेश में उन्नत देसी नस्लों को बढ़ावा देने के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे थे। अब ईटीटी प्रभारी डॉ आंनद सिंह कुशवाह की अगुवाई में बेरोजगार लेकिन कृत्रिम गर्भाधान में दक्ष युवकों, गो सेवकों या पशु मित्रों को इसकी विशेष ट्रेनिंग दी गई है। अब यही प्रशिक्षित युवक  गांव-गांव जाकर सामान्य गायों में उन्नत नस्ल के भू्रणों का प्रत्यारोपण करेंगे। नतीजे में पशुपालकों और किसानो को अब गोवंश के गर्भाधान के लिए अस्पताल की दूरी तय करने या पसंदीदा एंब्रियों के आने तक इंतजार नहीं करना पडेÞगा।

मप्र में गोवंश की स्थिति

-10.27प्रतिशत देश का गोवंश है, जिससे मप्र प्रथम स्थान पर है

-196 लाख गोवंशीय पशु 2012 की 19 वीं पशु संगणना के अनुसार

-8.40 लाख संकर नस्ल और 187लाख देसी गोवंश है

-2.34 लीटर प्रतिदिन देसी गोवंश काऔसतन दुग्ध उत्पादन 

30 सालों की कोशिशों का नतीजा 

देसी गोवंश का कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार के बीते 30 सालों से प्रयास चल रहे हैं। इसके लिए उत्कृष्ट सांडों की जरूरत होती है, ताकि उनका वीर्य संकलित करके 1960 सेल्सियत पर हिमीकृत अवस्था में कृत्रिम गर्भाधान के लिए तैयार किया जा सके। ऐसे में मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम ने वर्ष 2013-14 में भ्रूण प्रत्यारोण प्रयोगशाला की स्थापना भदभदा, भोपाल में की। इससे उन्नत नस्लों के सांडों का फ्रोजन सीमन तैयार होने लगा है। एंब्रियों ट्रांसप्लांट तकनीक से अभी तक 894 भू्रण के प्रत्यारोपण से 391 सेरोगेट मादाओं को गर्भित किया गया है, जिनसें 249 वत्सों का जन्म हो चुका है।

यह है भू्रण प्रत्यारोण तकनीक

-विशुद्ध नस्ल की गायों (अधिकतम दुग्ध उत्पादन क्षमता) का चयन किया जाकर सुपरओव्यूलेशन कराया जाता है। इससे गाय सामान्यत: होने वाले एक अण्डे के स्थान पर 4 से 25 अंडे तक अण्डे उत्सर्जित करती है। इन्हीं अण्डों का समुचित उपयोग किया जाता है। 

-मादा के गर्भाशय में इन अण्ड़ों को उत्कृष्ट सांड के वीर्य द्वारा निषेचित कराया जाता है तथा सात दिन के बाद  गर्भाशय से भू्रण संकलित कर प्रयोगशाला में जांचे जाते है। इनमें से अच्छी गुणवत्ता वाले भू्रण कम उत्पादन वाली नस्ल की गायों में प्रत्यारोपित किए जाते हैं। 

-इससे निम्न गुणवत्ताओं वाली गायों से भी उच्च गुणवत्ता वाले श्रेष्ठ वत्सों का जन्म होता है तथा उच्च नस्ल की श्रेष्ठ  गाय से जहां सामान्यत: पूरे जीवन काल में 7-8 वत्स ही प्राप्त हो पाते है, वहीं इस तकनीक से 50-60 तक वत्सों का उत्पादन होता है। 

देसी उन्नत नस्लों का संरक्षण होगा

विदेशी के बजाय उन्नत देसी नस्लो को बढ़ावा देने में यह तकनीक बेहद कारगर साबित होगी। देश में पहली मार मध्यप्रदेश में गांव-गांव में एंब्रियों ट्रांसप्लांट की सुविधा होने से दुधारू गोवंश बढेÞगा। 

         डॉ. हरभान सिंह भदौरिया, एमडी, पशुपालन निगम

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