समूह से जुड़कर महिलाएं बनी आत्मनिर्भर, सैंकडों महिलाओं को मिला रोजगार। - Sri Narada News

समूह से जुड़कर महिलाएं बनी आत्मनिर्भर, सैंकडों महिलाओं को मिला रोजगार।

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सबलगढ। ज्ञात हो कि आत्मनिर्भर भारत के स्लोगन को साकार रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान ग्रामीण महिलाओं का देखने मिला,कहानी सबलगढ जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में संचालित स्व सहायता समूहों की है,शासन की महत्वपूर्ण योजना मध्यप्रदेस डे-ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत  ग्राम पंचायतों में समूह की महिलाओं ने समूह से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर लिया है,ज्ञात हो कि शिक्षा विभाग द्वारा पोर्टल के माध्यम से स्व सहायता समूहों को कक्षा 1 से 8 वीं तक के छात्र/छात्राओं को गणवेश सिलकर देने का काम मिला है जिसमें समूह की महिलाओं को गणवेश सिलकर अप्रैल में तैयार करके देना है,इस कार्य के लिए दिनांक 7 फरवरी को पंचायत स्तर पर टेंडर प्रक्रिया रखी गई थी जिसमें दीदी गारमेंट माया स्व सहायता समूह पर हुई जिसमें 9 फर्मों द्वारा कपड़ा भेजने के लिए टेण्डर डाले थे,जिसमें सबसे कम रेट पर कैलारस, टीकमगढ़ व ग्वालियर की फर्मो को कपड़े सप्लाई करने का कार्य दिया गया जिसमें सबलगढ ब्लॉक के 289 प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय में से 276 स्कूल वेरिफाई हुए हैं उन विद्यालय के 12809 छात्रों और 11955 छात्राओं को गणवेश दी जानी है,जनपद पंचायत सबलगढ अंतर्गत आने वाली पंचायतों कुतघान,टोंगा,रामपुर गिर्द,लकेन्जरा, कटघर,पासोंन कला आदि ग्राम पंचायतों से लगभग 20 स्व.सहायता समूह की लगभग सैंकड़ो महिलाओं द्वारा गणवेश सिलाई का कार्य किया जा रहा है,जो कि ट्रेनिग के उपरांत सम्भव हो पाया है और बद्धपुरा रोड़ पर आंगनवाड़ी भवन में सिलाई सेंटर में सभी महिला समूह अपनी अपनी मशीन से कपङे सिलने का काम करतीं हैं इन्हें साइज के हिसाब से पेंट,स्कर्ट ,शर्ट आदि का कपड़ा दिया जारहा है जिसे सभी महिलाएं मिलजुल कर सिलकर गर्व महसूस कर रहीं हैं।

"ब्लॉक समन्वयक आजीविका मिशन सबलगढ के प्रयासों से जाग्रत हुए समूह"

समूह की महिलाओं से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया की हमारे ब्लॉक समन्वयक राकेश चंदेल सर द्वारा हमें समूह के संचालन व कार्य के विषय में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी दी व आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया,आज उन्ही के प्रयासों से हम इस काबिल बनी हैं कि हमें अब किसी पर हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है,गणवेश के सिलाई के कार्य से हम खुश भी हैं और हमें रोजगार मिल गया  अगर इसी तरह हमें सिलाई का या अन्य कोई कार्य मिलता रहा तो हम भी घर का खर्चा चला सकतीं हैं।

"कुछ व्यवधान आने पर एसडीएम को दिया आवेदन"

ज्ञात हो कि स्व सहायता समूह की महिलाओं ने एसडीएम सबलगढ़ को आवेदन दिया गया जिसके जरिये उन्होंने बताया कि हम सभी महिलाएं सिलाई सेन्टर पर लगभग 4 माह से सिलाई का कार्य कर रहीं हैं वर्तमान में गणवेश का कार्य चल रहा है,लेकिन हमारे संगठन की कैलादेवी स्व.सहायता समूह कुतघान  की अध्यक्ष 2 माह से हमारे साथ ही सेन्टर पर काम कर रहीं थी उनका कहना है कि हम पूरी सिलाई अपने घर पर ही करेंगे,जबकि नियम ये है कि सिलाई सेन्टर पर सुबह 10 बजे से 5 बजे तक कार्य करना है। सिलाई सेंटर पर कार्य करने वाले समूहों में माया स्व सहायता समूह,जय शीतला माँ समूह,कृष्णा समूह,काली माँ समूह,जय भीम,जय कपिला बाबा,जय बजरंगबलि समूह,जय महाकालेश्वर समूह,जय दांगी स्व सहायता समूह आदि।

बाईट--हम सभी समूह की महिलाओं को जो गणवेश सिलाई का कार्य मिला है हम सभी कार्य करने वाली महिलाएं खुश हैं आगे भी हमें इसी तरह सभी महिलाओं को रोजगार मिलता रहे।

माया शाक्य, अध्यक्ष माया स्व सहायता समूह बद्धपुरा कुतघान।

बाईट--जो भी कार्य महिला समूहों को दिया गया है वो शासन के नियमानुसार है,हमारा कार्य शासन की योजनाओं की जानकारी स्व सहायता समूहों को देना है,गणवेश सिलाई का कार्य कर रहीं महिलाएं सभी अपने कार्य से खुश हैं।

राघवेन्द्र चंदेल, ब्लॉक समन्वयक आजीविका मिशन सबलगढ।

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