सुप्रीम फैसला आने वाला है, तो मंत्री समूह सिफारिशें सही दिशा में करे - Sri Narada News

सुप्रीम फैसला आने वाला है, तो मंत्री समूह सिफारिशें सही दिशा में करे

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सपाक्स की बैठक में एससी/एसटी पर क्रीमीलेयर लागू करने की उठी मांग

भोपाल। जब एक महीने में ही पदोन्नति में आरक्षण संबंधी 133 मामलों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है तो फिर मंत्री समूह की सिफारिशें भी सकारात्मक आनी चाहिए। ताकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विपरीत सिफारिशें होने से फिर से पदोन्नति का मुद्दा विवादों में नहीं फंस जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले के अनुसार एससी/एसटी वर्ग पर क्रीमी लेयर लागू की जाए।

यह कहना है सपाक्स (सवर्ण, पिछड़ावर्ग, अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी संस्था) का, जिसकी बुधवार को हुई बैठक में संस्थापक अध्यक्ष डॉ. केदार सिंह तोमर, अजय कुमार जैन, सचिव राजीव कुमार खरे, रक्षा दुबे, आलोक अग्रवाल, भानु सिंह तोमर, देवेंद्र सिंह भदौरिया, डॉ. सतीश कुमार श्रीवास्तव, राकेश नायक, डॉ. पुष्पेंद्र पाल सिंह, पंकज तिवारी, अभिषेक तिवारी, प्रसंग परिहार, अमरेश, दिनेश आदि मौजूद थे। ज्ञात हो कि बीते मंगलवार को आरक्षण संबंधी मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब राज्य सरकारों को और अधिक समय नहीं दिया जाएगा। बल्कि 5 अक्टूबर से लगातार सुनवाई करके महीनेभर में ही निर्णय सुनाया जाएगा। सपाक्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रा साहनी, एम नागराज और वर्ष 2018 में 5 न्यायधीशों की पीठ द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर ही निपटारा किया जाएगा। जाहिर है जो भी नियम इनकी पूर्ति नहीं करते वे असंवैधानिक हैं। मप्र में पदोन्नति में आरक्षण संबंधी मामले में पूर्व में ही उच्च न्यायालय में यह स्थापित हो चुका है कि पदोन्नति नियम एम नागराज प्रकरण में निर्धारित मापदंडों के विरोध में हैं। वैसे भी हाईकोर्ट मप्र के 2016 के फैसले से साफ हो चुका है कि पदोन्नति में आरक्षण के नियम के कारण सवर्ण, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के साथ घोर अन्याय हो चुका है। 

मंत्री समूह की सिफारिशें सटीक हों

सपाक्स ने चेताया है कि पदोन्नति के मामले को लेकर गठित मंत्री समूह की सिफारिशें भी आनी हैं। ऐसे में कोर्ट के अंतिम निर्णय के आदेशानुसार ही मंत्री समूह की अनुशंसाएं होंगी तो भविष्य में विसंगति से बचा जा सकेगा। अन्यथा फिर से कोर्ट केस शुरु हो जाएंगे। नियमों को तैयार करने से पूर्व प्रत्येक स्तर पर प्रतिनिधित्व के साथ ही प्रशासनिक दक्षता पर असर को आंकने के मापदंड भी तय होने चाहिए। सपाक्स ने महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर प्रतिनिधित्व का निर्धारण करने की मांग की है। इससे विवादास्पद बिंदुओं पर स्पष्ट प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।

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