राजनीति और धर्म का सम्मिश्रण है देश हित की नीव-सद्गुरू ऋतेश्वर महाराज - Sri Narada News

राजनीति और धर्म का सम्मिश्रण है देश हित की नीव-सद्गुरू ऋतेश्वर महाराज

Share This

मानस भवन में अमृत संचरण शिविर में पहली बार किसी संत ने किया आगाज 

भोपाल। सद्गुरू ऋतेश्वर महाराज ने कहा है कि राजनीति और धर्म को अलग-अलग करके कभी भी किसी में नीति लाई नहीं जा सकती। जनता धर्मसम्मत राजनीति चाहती है। ऐसे में धर्म और राजनीति अलग नहीं हो सकते। 

वृंदावन से पधारे सद्गुरु सोमवार को मानस भवन में आयोजित अमृत संचरण शिविर में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इस आयोजन का मंगलवार को समापन होगा। उन्होंने कहा कि हर युग में राजतंत्र गुरु संत ऋषि के आदेश निर्देश से ही निर्वहन हुआ करता था। राजा दशरथ के राज्य में आठ कुल गुरु की उपस्थिति में राज्य की स्थिति पर विचार विमर्श हुआ करता था।  ऋषी उचित अनुचित बताते उनके आदेश को राजा शिरोधार्य कर प्रजा के हित में कार्य किया करते थे।  ये था भारत जहां ऋषियों के आदेश बिना एक कदम कोई राजा उठता नही था। देश शब्द बना ही है आदेश से। आज का समाज कहता है राजनीति और धर्म अलग अलग होना चाहिए । ये इस देश का सबसे दुर्भिक्ष स्थिति है जो खुद कह रहे राजनीति में धर्म नही चाहिए। क्या अधर्म की नीति देश में चाहते हो?

युवाओं में पाजिटीविटी आनी चाहिए

सद्गुरू ने कहा कि शिविर का आयोजन भारत देश में युवाओं के बीच पॉजिटिविटी के लिए है, क्योकि सबसे बड़ी समस्या डिप्रेशन की है। आप देश को भौतिक रूप से चाहे जितना समृद्ध कर लीजिए, अमेरिका यूरोप की कंट्री यह सब बहुत समृद्ध हो चुके है उसके बाद भी वृंदावन में आकर वहां के लोग गले में कंठी पहन कर हाथों में माला लेकर 15 किलोमीटर वृंदावन की परिक्रमा लगाते हुए 4:00 बजे सुबह उठकर चल पड़ते हैैं। भारत के युवाओं को यह अंगीकार करना होगा कि पहले से ही विश्व गुरु हो अध्यात्म का खजाना आपके पास है आप क्यों भौतिक जगत के पीछे भाग रहे हो। जीवन जीने की कला है अध्यात्म जीवन जीने की कला है जो प्राप्त है वही पर्याप्त है वही सर्वत्र व्याप्त है। इस जगत में कोई साइको होकर जीना नहीं चाहता।  कोई तनाव में जीना नहीं चाहता।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें