राम दरबार, वैष्णो देवी ,शनि महाराज, शिवशंकर जी, राधाकृष्ण सहित हनुमानजी महाराज विराजे हैं मंदिर में। - Sri Narada News

राम दरबार, वैष्णो देवी ,शनि महाराज, शिवशंकर जी, राधाकृष्ण सहित हनुमानजी महाराज विराजे हैं मंदिर में।

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विदिशा। विदिशा रेलवे स्टेशन परिसर में विराजित हैं मां सिध्देश्वरी दुर्गा जी। झांकी से मन्दिर तक  की एक दशक की यात्रा रही है। सन 1970,71 में रेल कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों ने दुर्गा जी की झांकी लगाना प्रारभ किया, तब विदिशा में प्रतिमा बनाने में उतनी कुशलता नही आ पाई थी कि, मूर्ति कला के प्रदर्शन में अंक मिल सके ,इसीलिए इस पूरे प्रकल्प से शुरू से ही जुड़े हुए सतीश जैन ,ठाकुर लाल सिंह आदि लोग नागपुर से कभी होशंगाबाद से मूर्ति लेकर आते  थे,यही कारण था अनेक  वर्षों तक प्रथम पुरस्कार प्राप्त होता रहा।

दुर्गा जी की झांकी ,जिस स्थान पर लगाना शुरू किया,वहाँ ,पहले से ही एक वृक्ष के नीचे एक प्राचीन मूर्ति रखी हुई थी, सिंदूर पुती इस मूर्ति को लोग जल चढ़ा कर पूजते रहे थे, इसी स्थान पर झांकी लगाना शुरू हुआ।1981, 82 में विचार बना की मैया की मड़िया बनाई जाए, दुर्गा जी की मूर्ति लाने हेतु  रेलवे के टी सी अग्रवाल जी, ठाकुर लालसिंह आदि ने चंदा एकत्र किया और सतीश जैन के मार्गदर्शन में मैया की एक छोटी प्रतिमा ले आये, और बड़े ही उत्साह 

साथ झांकी के स्थान पर दुर्गा जी  की छोटी प्रतिमा स्थापित कर दी गई और टेंट ,चादर आदि का अस्थायी मन्दिर का स्वरूप बनाया गया। इसी के बाद मन्दिर बनाने का संकल्प सभी ने तय कर लिया।

इस तरह सर्वजन के सहयोग से एक विशाल  देवी  मन्दिर की बुनियाद शुरू हुई जो आज अपने भव्य स्वरूप में दर्शनीय स्थल बन चुका है।

 मन्दिर परिसर में रामदरबार की अनोखी प्रतिमा है जो माता सीता के साथ राम जी और तीनों भाइयों, लक्ष्मण, भरत ,शत्रुघ्न के साथ गुरु वशिष्ठ, हनुमानजी महाराज के साथ ही बाबा तुलसीदास जी के दर्शन  कराती है।

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