रायसेन जिले के बोरास में मकर संक्रांति के दिन शहीद संक्रांति मनाई जाती है। इसकी शुरुआत आजादी के ठीक बाद हुई - Sri Narada News

रायसेन जिले के बोरास में मकर संक्रांति के दिन शहीद संक्रांति मनाई जाती है। इसकी शुरुआत आजादी के ठीक बाद हुई

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भोपाल रियासत के भारत में विलय को लेकर यहां के देशभक्तों ने जोरदार आंदोलन किया था जिसमें 4 लोग शहीद हुए थे।

रायसेन के बोरास नर्मदाघाट में 14 जनवरी को मनती है शहीद संक्रांति।

भोपाल रियासत के भारत में विलय को लेकर यहां शहीद हुए थे 4 आंदोलनकारी।

देश की आजादी के 659 दिन बाद भोपाल में लहराया था भारत का तिरंगा

सीएल गौर, रायसेन। रायसेन। सारा देश 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाता है लेकिन रायसेन जिले के नर्मदाघाट बोरास में शहीद संक्रांति मनाई जाती है। इसका संबंध आजादी के बाद भोपाल रियासत के भारतीय गणराज्य में विलय से है जिसके चलते बोरास में चार देशभक्तों को शहीद होना पड़ा था।

विधायक रामपाल सिंह सहित क्षेत्र के समाजसेवियों ने 14 जनवरी को चारों अमर शहीद के परिजनों का सम्मान किया।

दरअसल,15 अगस्त, 1947 को देश के आजाद होने के बाद भी भोपाल रियासत भारतीय गणराज्य में शामिल नहीं हुआ था। भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खां इसे स्वतंत्र रियासत के रूप में रखना चाहते थे। साथ ही हैदराबाद का निजाम उन्हें भोपाल रियासत का पाकिस्तान में विलय के लिए प्रेरित कर रहे थे। इधर देश की आजादी के इतने समय बाद भी भोपाल रियासत का विलय न होने से जनता में भारी आक्रोश था। यह जनआक्रोश विलीनीकरण आन्दोलन में परिवर्तित हो गया और इस आन्दोलन ने आगे जाकर उग्र रूप धारण लिया।

भोपाल रियासत के भारत गणराज्य में विलय के लिए रायसेन, सीहोर और होशंगाबाद से आन्दोलनकारी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। रायसेन में ही उद्धवदास मेहता, बालमुकन्द, जमना प्रसाद और लाल सिंह ने विलीनीकरण आन्दोलन को चलाने के लिए जनवरी-फरवरी 1948 में प्रजा मंडल की स्थापना की थी। नवाबी शासन ने आन्दोलन को दबाने का भरसक प्रयास किया। आन्दोलनकारियों पर लाठी-गोलियां चलवाई गईं। इसी में रायसेन जिले के बोरास गांव में 4 युवा शहीद हुए थे।

दरअसल, 14 जनवरी, 1949 को उदयपुरा तहसील के बोरास के नर्मदा तट पर विलीनीकरण आन्दोलन को लेकर विशाल सभा चल रही थी। सभा को चारों ओर से भारी पुलिस बल ने घेर रखा था। सभा में आने वालों के पास जो लाठियां और डण्डे थे, उन्हें पुलिस ने रखवा लिया। आन्दोलन के सभी बड़े नेताओं को पहले ही बन्दी बना लिया गया था।

बोरास में 14 जनवरी को तिरंगा झण्डा फहराया जाना था। बड़े नेताओं की गैर मौजूदगी में बैजनाथ गुप्ता आगे आए और उन्होंने तिरंगा झण्डा फहराया। तिरंगा फहराते ही बोरास का नर्मदा तट भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। पुलिस के मुखिया ने चेतावनी दी कि जो विलय के पक्ष में नारे लगाएगा, उसे गोलियों से भून दिया जाएगा। धमकी सुनते ही एक 16 साल का किशोर छोटेलाल हाथ में तिरंगा लेकर आगे आया और उसने भारत माता की जय और विलीनीकरण होकर रहेगा का नारा लगाया। पुलिस ने छोटेलाल पर गोलियां चलाई और वह जमीन पर गिरता इससे पहले धन सिंह नामक युवक ने तिरंगा थाम लिया। धन सिंह पर भी गोलियां चलाई गईं। फिर मंगलसिंह पर और विशाल सिंह पर गोलियां चलाई गईं लेकिन किसी ने भी तिरंगा नीचे नहीं गिरने दिया। इस गोली काण्ड में कई लोग गम्भीर रूप से घायल भी हुए थे।

बोरास में आयोजित इस सभा में होशंगाबाद और सीहोर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। बोरास में 16 जनवरी को शहीदों की विशाल शव यात्रा निकाली गई जिसमें हजारों लोगों ने आंसुओं के साथ विलीनीकरण आन्दोलन के इन शहीदों को विदा किया। बोरास का नर्मदा तट शहीद अमर रहे और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। बोरास के गोली काण्ड की सूचना सरदार वल्लभ भाई पटेल को मिलते ही उन्होंने वीपी मेनन को भोपाल भेजा था, जिसके बाद भोपाल रियासत का 1 जून 1949 को भारत गणराज्य में विलय हो गया और भारत की आजादी के 659 दिन बाद भोपाल में तिरंगा झण्डा फहाराया गया।

उदयपुरा बरेली विधानसभा विधायक देवेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि शहीदों की स्मृति में रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील के ग्राम बोरास में नर्मदा तट पर 14 जनवरी 1984 में शहीद स्मारक स्थापित किया गया है। नर्मदा के साथ-साथ बोरास का यह शहीद स्मारक भी उतना ही पावन और श्रृद्धा का केन्द्र है। हर साल यहां 14 जनवरी को  शहीद संक्रांति मनाई जाती है।

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