जेल में मौत जेलर टीआई डॉक्टर, टीआई के खिलाफ हत्या का मुकदमा - Sri Narada News

जेल में मौत जेलर टीआई डॉक्टर, टीआई के खिलाफ हत्या का मुकदमा

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भोपाल। जेल में बंद युवक की मौत  मामले में  निरीक्षक मनीष राज भदौरिया,  डीएल यादव, जेलर आलोक बाजपेई , हमीदिया अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉक्टर आनंद साहून, क्राईम ब्रांच के तत्कालीन प्रधान आरक्षक  एहसान , मुरली , दिनेश और  चिरौंजी पर हत्या तथा साक्ष्य मिटाने का षड़यंत्र करने का  मुकदमा दर्ज  कर आरोपीगणों को 27 जून  को अदालत में हाजिर होने के आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट  स्नेहलता सिंह ने मृतक के परिजन एडवोकेट यावर खान के परिवाद पर सुनवाई के बाद दिए हैं । 4 जून 2015 को क्राईम ब्रांच के तत्कालीन प्रधान आरक्षक  एहसान , मुरली , दिनेश और चिरौंजी  मृतक मोहसीन का उसके घर से अपहरण कर  जबरस्ती  क्राईम ब्रांच के ऑफिस  लेजाकर  अत्याधिक मारपीट कर और थर्ड डिग्री देकर उससे 2  लाख रुपयों की मांग की थी। मोहसिन ने उससे मिलने गए परिजनों  को यह बात बताई थी। क्राईम ब्रांच से मोहसिन को थाना टीटी नगर ले जाया गया , जहां पर  निरीक्षक डीएल यादव  और उपनिरीक्षक  मनीष राज भदौरिया  ने  भी 2  लाख रुपयों की मांग को लेकर  मोहसिन से जमकर मारपीट कर उसे अदालत में पेश कर भोपाल  केंद्रीय  जेल भेज दिया था। भोपाल  केंद्रीय  जेल  में जेलर और हमीदिया अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉक्टर आनंद साहू  ने  भी  मोहसिन से मारपीट कर उसे  प्रताडि़त किया।  डॉक्टर आनंद साहू  ने  मोहसिन से  एक लाख रुपयों की मांग क ी और रुपए न मिलने पर जानबूझकर उसका एक्सरे , एमआरआई, अल्ट्रा  साउण्ड एवं सीटी स्केन  नहीं किया। यही  नहीं डॉक्टर आनंद साहू ने मोहसीन के पागल होने के संबंध में कूटरचित एवं झूठे मेडीकल पर्चे बनाये और  मोहसीन को  ग्वालियर  मानसिक आरोग्य चिकित्सालय भेजने की टीप अंकित की।  पुलिस अधिकारियों , पुलिस कर्मचारियों और जेलर की मारपीट एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉक्टर आनंद साहू की प्रताडऩाओं के कारण मोहसीन की मृत्यु 23 जून 2015 को जेल में मौत हो गई थी

मोहसीन ने जेल  में मुलाकात करने पहुंचे परिजनों को आरोपीगण की प्रताडऩाओं के संबंध में बताया था। मोहसीन ने परिजनों को  बताया था कि  क्राईम ब्रांच और थाना टभ्ीटी नगर में उसे हेलमेट पहनाकर तथा करंट लगाकर मारा पीटा जाता था। जेल में उसके  हाथ एवं पैर रस्सी से बांधकर दिनभर एक कोठरी में बंद रखा  जाता था। जेल प्रबंधन ने मोहसीन को आयी चोटों का  जानबूझकर ईलाज नहीं कराया ।

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